अल्फाज 1

Amita Sonawane

अल्फाज 1
(14)
वाचक संख्या − 77
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सारांश

मैं तेरी पेहली ना सही, पर तू मेरी आखरी मोहब्बत है, प्यार बडा कमाल था हम दोनो के बिच, जिसमे ना इजहार था, ना इनकार हैं, चल आझाद किया मैने तुझे अपनी वफाओसे, उन कसमोंसे, वादोंसे, उन गुन्हाओंसे, तेरा ...

टिप्पण्या

एक टिप्पणी लिहा
dinesh kadam
superb
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Shamal Priya
very nice....
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Ashwini
मस्त
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संजय  स गुरव
👌👌👌👌
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Ekta Rasal Rasal
amazing
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Amit Rana
अप्रतिम रचना
प्रत्युत्तर
अनामिक वानखेडे
बढिया
प्रत्युत्तर
Vinay Rawal
great
प्रत्युत्तर
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