अल्फाज 1

Amita Sonawane

अल्फाज 1
(17)
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सारांश

तेरे जिस्म से मेरे रुह तक कुछ अल्फाज बाकी है! तु कर गया कुछ उन्हे खाली ऐसे, पर उनकी गेहराई आज भी वही है... ...

टिप्पण्या

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Anurag Chaturvedi
adbhut rachna Anupam abhivykti
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Anand kharate
क्या बात
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dinesh kadam
superb
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Shamal Priya
very nice....
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A 🌸
मस्त
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संजय  स गुरव
👌👌👌👌
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Ekta Rasal
amazing
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Amit Rana
अप्रतिम रचना
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अनामिक वानखेडे
बढिया
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