Akash Bhalekar
प्रकाशित साहित्य
0
वाचक संख्या
5
आवड संख्या
0

चरित्र  

प्रतिलिपि सोबत:    

सारांश:

उसने दर्द इतना दिया की सहा ना गया,उसकी आदत सी थि इसलिये रहा ना गया,आज भी रोता हू ऊसे दूर देखके,लेकिन दर्द देने वाले से ये कहा ना गया.😭😭😭😭



Umesh Salunke

230 अनुयायी
marathi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया वर अनुसरण करा
     

आमच्या विषयी
आमच्यासोबत काम करा
गोपनीयता धोरण
सेवा अटी
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.